Showing posts with label Devashish Pandey. Show all posts
Showing posts with label Devashish Pandey. Show all posts

Monday, June 20, 2011

Sunday..

सुबह चाय की चुस्की के साथ पेपर का हर पन्ना पलटाया,
बहोत दिनों के बाद हमने Sunday को Sunday जैसा मनाया..

अलसाई सुबह, आराम दोपहर शाम जैसे एक बेपरवाह सफ़र..
आज वक़्त ने हमको कम..और हमने वक़्त को ज्यादा बिताया..

बीती रात एक पुरानी किताब..साथ उसके कुछ नगमा गुनगुनाया..
'आज तक' और 'India TV' ने काफी दिनों बाद हंसाया!

यारों से गप्पें भी मारी, सबको चुन चुन कर फ़ोन घुमाया..
एक चैन की नींद भी लें ही लें अब...Sunday ख़त्म होने को आया :)




Friday, April 22, 2011

बूँद


छोडती हैं जो आसमान ,
मिट्टी में मिल जाने के लिए|
फिर बह दूर उस मिटटी से ही,
सागर में खो जाने के लिए|
                                                    बहती हैं भाव के झरने बन,
                                                    जब बैठूं कभी मैं पलकें मूँद |
                                                    शीतल, निर्मल, निज आभा लिए,
                                                    छोटी सी एक पानी की बूँद | :)

Thursday, March 10, 2011

सजदा

ऐ खुदा मुझे भी नवाज़ दे कुछ ऐसी अर्श-ए-बंदगी,
जो ज़िन्दगी को ख्वाब दे और ख़्वाबों को ज़िन्दगी|

क्यूँ पलकें मूँद कर चाहते हैं हम नयी दुनिया यहाँ?
बुझती कहाँ हैं अश्कों से भी आँखों की ये तिशनगी|

जो तू रहता है हर ज़र्रे में और हर सांस है रहमत तेरी,
किस फलसफे में उलझे हैं हम, है नाम जिसका ज़िन्दगी?

दे नियाज़ वो के बन्दे तेरे अपने मसीहा खुद बने,
वो चिराग ही रौशन हुए जिनमे तेरी है लौ जगी|

Thursday, September 23, 2010

शिकायत ...

किसी ने सोच कर ही कुछ ये इनका नाम रखा है,
तनहा खामोश रातों में घडी के 'कांटे' चुभते हैं !

अजब फितरत है ये कमबख्त किस्मत से उलझने की,
कुछ ऐसे फूल हैं जो आदतन पथ्हर पे खिलते हैं !

राहों में धूप, बारिश , मील के पथ्हर ही यार मिले,
जहां से हम मुड़े शायद वहां ही हमसफ़र मिलते हैं !

कलम भी श्याही पी कर आजकल ज्यादा बहकती है,
जानती नहीं अब कागज़ पे बस लैला-मजनू बिकते हैं !

Tuesday, September 21, 2010

खुशरंग

बने खुशरंग तेरे सपने,
मेरी आँखों के रंग से ही |
मैं बस कल रात जागा था,
ये कितनी सुर्ख हैं देखो !
Follow devashishpandey on Twitter